कोरोना काल में पार्किंग मद में केएमसी को उठाना पड़ रहा आर्थिक नुकसान

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कोलकाता: केएमसी इलाके में रास्तों पर पार्किंग मद में आय नहीं हो रही है। लॉकडाउन के समय महानगर में अधिक गाड़ियां नहीं चलती थी, इस वजह से पार्किंग से जितनी आय सामान्य समय में होती थी, इस दौरान नहीं हो पायी है। वर्तमान में लॉकडाउन में कई तरह की छुट दी गयी है, लेकिन पार्किंग से आय नहीं हो रही है। इसलिए केएमसी का कोषागार खाली हो रहा है। इसके अतिरिक्त ऐसी कई संस्थाएं हैं, जो पार्किंग फीस वसूलती हैं।

कोरोना संक्रमण के डर से वे भी पार्किंग फीस वसूलने से कतरा रही है। केएमसी की प्रशासकमंडली के सदस्य और पार्किंग विभाग के पूर्व मेयर परिषद देवाशीष कुमार का कहना है कि लॉकडाउन के कारण मार्च माह से मध्य से लेकर मई माह तक महानगर में गाड़ियों की आवाजाही कम थी। इस वजह से पार्किंग भी कम हुई। इसलिए पार्किंग मद में केएमसी की जो आय होनी चाहिए थी, वह नहीं हो पायी। वर्तमान समय में नाईट पार्किंग लगभग पूरी तरह ही बंद है। इसलिए वहां से भी कोई आय नहीं हो रही है। केएमसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक महीने में पार्किंग मद में केएमसी लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपयों का आय करता था। लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही यह आय घटकर 20 लाख पर आ गया है।

वहीं कुछ पार्किंग फीस वसूलने वाली संस्थाओं ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से सड़कों पर गाड़ियां ना के बराबर उतरी हैं। इसलिए पार्किंग का तो सवाल ही नहीं उठता है। पिछले एक माह से सड़कों के किनारों पर पार्किंग तो हो रही है, लेकिन वह पहले की तुलना में काफी कम है। फिलहाल केवल ऑफिसपाड़ा में ही अधिक पार्किंग हो रही है। शहर के सभी स्थानों पर नाईट पार्किंग पूरी तरह बंद है। कई संस्थाओं की तरफ से कहा जा रहा है कि जो लोग बाहर निकलकर केएमसी द्वारा आवंटित पार्किंग जोन से जो लोग फीस वसूलते हैं, वे कोरोना संक्रमण के डर से काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा महानगर के विभिन्न इलाकों के कंटेंमेंट जोन बन जाने के कारण उन जगहों से पार्किंग फीस लेने का कार्य शुरू करके फिर से बंद कर दिया गया। इस वजह से केएमसी को स्वभाविक तौर पर काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

 

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